दिवाली पूजन सामग्री को लेकर हर साल एक सवाल जरूर आता है। लक्ष्मी पूजन के बाद बचे हुए फूल, दीपक, कलश, नारियल और मूर्तियों का क्या किया जाए? अगर आपके मन में भी यही दुविधा है तो घबराइए नहीं। श्रद्धा के साथ और साफ-सुथरे तरीके से इन चीजों को संभालना ही सबसे उचित माना जाता है।
अगर आपने अभी दीपावली की तैयारी शुरू की है, तो दिवाली पर लक्ष्मी-गणेश पूजा की पूरी सामग्री सूची भी देख सकते हैं।
याद रखें: पूजा में इस्तेमाल हुई वस्तुओं का सम्मान करना जरूरी है। लेकिन हर चीज को हमेशा संभालकर रखना भी आवश्यक नहीं होता। कुछ वस्तुएँ पुनः उपयोग की जा सकती हैं और कुछ का श्रद्धापूर्वक विसर्जन या प्राकृतिक निपटान किया जाता है।
सबसे पहले जानिए, दीपावली 2026 की मुख्य तिथियां

| पर्व | तिथि | सूर्योदय | सूर्यास्त | विशेष समय |
|---|---|---|---|---|
| धनतेरस | 6 नवंबर 2026, शुक्रवार | 06:34 | 17:45 | प्रदोष काल 17:45–20:09 |
| नरक चतुर्दशी (छोटी दिवाली) | 8 नवंबर 2026, रविवार | 06:35 | 17:44 | — |
| दीपावली (लक्ष्मी पूजन) | 8 नवंबर 2026, रविवार | 06:35 | 17:44 | प्रदोष काल 17:44–20:08 |
| भाई दूज | 11 नवंबर 2026, बुधवार | 06:37 | 17:43 | — |
स्थानीय पंचांग के अनुसार समय में थोड़ा अंतर हो सकता है।
मिट्टी के दीपक बचे हों तो क्या करें?
दिवाली के बाद सबसे ज्यादा दीपक ही बचते हैं। बहुत से लोग उन्हें सीधे कूड़े में डाल देते हैं, लेकिन ऐसा करने से बचना बेहतर माना जाता है।
यदि दीपक सही हालत में हैं तो:
- उन्हें साफ करके अगली पूजा के लिए संभालकर रख सकते हैं।
- घर के मंदिर में समय-समय पर उपयोग कर सकते हैं।
- पौधों के पास सजावट के रूप में भी रख सकते हैं।
अगर दीपक टूट गए हों या उपयोग योग्य न हों, तो उन्हें साफ जगह पर मिट्टी में मिला देना एक सामान्य और सम्मानजनक तरीका माना जाता है।
पूजा के फूल, माला और पत्तियों का क्या करें?
पूजा में चढ़े फूल कुछ ही दिनों में सूख जाते हैं। इन्हें कूड़े में फेंकने के बजाय:
- किसी पौधे की जड़ में रख सकते हैं।
- घर में कम्पोस्ट बनाते हैं तो उसमें डाल सकते हैं।
- सूखे फूलों को अलग इकट्ठा करके प्राकृतिक निपटान कर सकते हैं।
श्रद्धा और व्यवहारिक सलाह
मान्यता है कि पूजा में अर्पित फूलों का सम्मान होना चाहिए। दूसरी ओर, आधुनिक दृष्टि से भी जैविक सामग्री को प्रकृति में लौटाना पर्यावरण के लिए बेहतर माना जाता है।
कलश, नारियल और अनाज का क्या करें?
लक्ष्मी पूजन में रखे गए कलश और नारियल को लेकर भी लोग अक्सर पूछते हैं।
- कलश का जल तुलसी या किसी पौधे में अर्पित किया जा सकता है।
- नारियल प्रसाद के रूप में परिवार के साथ ग्रहण किया जा सकता है।
- पूजा में रखे चावल या अन्य अनाज पक्षियों को खिलाए जा सकते हैं या रसोई में उपयोग किए जा सकते हैं, यदि वे स्वच्छ अवस्था में हों।
मान्यता है कि प्रसाद को सम्मानपूर्वक ग्रहण करना शुभ माना जाता है। हालांकि इसे चमत्कारी परिणाम से जोड़ना उचित नहीं है।
लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियों का क्या करें?
यह सबसे महत्वपूर्ण प्रश्नों में से एक है।
यदि आपने धातु, पीतल, चांदी या स्थायी मूर्तियों की पूजा की है, तो उन्हें साफ करके अपने पूजा स्थान में स्थापित रखें। इन्हें विसर्जित नहीं किया जाता।
यदि विशेष रूप से अस्थायी मिट्टी की प्रतिमा स्थापित की गई थी, तो कई स्थानों पर स्थानीय परंपरा के अनुसार उसका विसर्जन किया जाता है।
परंपरा और व्यवहार में अंतर
- स्थायी मूर्तियां: पूजा घर में स्थापित रखें।
- अस्थायी मिट्टी की प्रतिमा: स्थानीय परंपरा के अनुसार विसर्जन या सम्मानपूर्वक मिट्टी में मिलाना।
- टूटी हुई पूजा प्रतिमा: कई परिवार परंपरा अनुसार अलग रखते हैं और नई प्रतिमा स्थापित करते हैं।
क्षेत्रीय परंपराएं अलग हो सकती हैं। इसलिए अपने परिवार की परंपरा का भी सम्मान करें।
यदि घर में मूर्तियों की स्थापना को लेकर आपके मन में प्रश्न हैं, तो घर के पूजा घर में यह मूर्तियां साथ में नहीं होनी चाहिए? लेख भी उपयोगी लग सकता है।
किन चीजों को सीधे कूड़े में नहीं डालना चाहिए?
कई लोग सफाई करते समय पूजा की सारी सामग्री एक साथ फेंक देते हैं। बेहतर होगा कि इन वस्तुओं को अलग करें:
- पूजा में चढ़े फूल और पत्तियां
- दीपक
- रोली, अक्षत जैसी पूजन सामग्री
- मूर्तियां
- कलश का जल
इससे श्रद्धा भी बनी रहती है और पर्यावरण को भी कम नुकसान होता है।
श्रद्धा, मान्यता और व्यवहारिक सलाह को अलग समझिए
मान्यता क्या कहती है?
मान्यता है कि पूजा में उपयोग हुई वस्तुओं का सम्मानपूर्वक व्यवहार करना चाहिए। इसलिए उन्हें अपमानजनक तरीके से फेंकना उचित नहीं माना जाता।
परंपरा क्या कहती है?
भारत के अलग-अलग राज्यों और परिवारों में पूजा सामग्री के निपटान की अपनी परंपराएं हैं। कहीं विसर्जन होता है, तो कहीं मिट्टी में मिलाया जाता है।
व्यवहारिक सलाह क्या है?
आज पर्यावरण संरक्षण भी महत्वपूर्ण है। इसलिए जैविक सामग्री को कम्पोस्ट में डालना, दीपकों का पुनः उपयोग करना और जल को पौधों में अर्पित करना अच्छे विकल्प माने जा सकते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या दिवाली के दीपक अगले साल तक संभालकर रख सकते हैं?
हाँ। यदि दीपक सुरक्षित और साफ हैं, तो उन्हें अगले वर्ष या अन्य पूजन कार्यों में उपयोग किया जा सकता है।
क्या लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियों का हर साल विसर्जन करना जरूरी है?
नहीं। स्थायी पूजा की मूर्तियां सामान्यतः पूजा घर में ही स्थापित रखी जाती हैं। विसर्जन का चलन अधिकतर अस्थायी प्रतिमाओं के लिए देखा जाता है।
पूजा के चावल और अनाज का क्या करें?
यदि वे स्वच्छ हों तो प्रसाद रूप में उपयोग किए जा सकते हैं या पक्षियों को खिलाए जा सकते हैं।
क्या पूजा के सूखे फूल कूड़े में फेंकना गलत है?
कई लोग ऐसा नहीं करते। सामान्यतः उन्हें पौधों की जड़ों में, कम्पोस्ट में या प्राकृतिक तरीके से निपटाना अधिक सम्मानजनक माना जाता है।
दिवाली का असली संदेश सिर्फ पूजा तक सीमित नहीं है। पूजा के बाद उपयोग की गई वस्तुओं के प्रति सम्मान और स्वच्छता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। इसलिए जल्दबाजी में सब कुछ फेंकने के बजाय थोड़ा समय निकालकर सही तरीके से संभालें। यही श्रद्धा और जिम्मेदारी, दोनों का सुंदर संतुलन है।



