दिवाली की रात घर में कहाँ-कहाँ दीपक जलाएं? जानें 13 दीयों का महत्व

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नवम्बर 1, 2026

दिवाली के 13 दीये घर में कहाँ जलाने चाहिए? क्या मुख्य दरवाजे पर दीपक रखना जरूरी है? और क्या किसी जगह दीया रखना भूल जाएं तो पूजा अधूरी रह जाती है? ऐसे सवाल दिवाली की तैयारी करते समय कई लोगों के मन में आते हैं।

सीधी बात यह है कि दिवाली पर मुख्य द्वार, पूजा घर, आंगन और तुलसी के पास दीपक जलाने की परंपरा कई परिवारों में मिलती है। वहीं, 13 दीये जलाने की मान्यता विशेष रूप से धनतेरस से भी जुड़ी हुई है।

लेकिन एक बात जरूर समझिए। हर परिवार में ठीक 13 दीये जलाना कोई एक जैसा अनिवार्य नियम नहीं है। अलग-अलग घरों में दीयों की संख्या और उन्हें रखने की जगह बदल सकती है।

दिवाली की रात 13 दीये कहाँ जलाएं? हर जगह का अपना महत्व

दिवाली के 13 दीये घर के मुख्य दरवाजे और रंगोली के पास सजाती मां और बेटी, साथ में गेंदे के फूल।
दिवाली की रात 13 दीये कहाँ जलाएं? हर जगह का अपना महत्व

दिवाली आते ही घर की सफाई, सजावट और लक्ष्मी पूजन की तैयारियां शुरू हो जाती हैं। कोई मिट्टी के दीपक खरीदता है, तो कोई पुराने दीयों को साफ करके रखता है।

लेकिन जब दीपक जलाने की बारी आती है, तब अक्सर सवाल उठता है कि पहले दीया कहाँ रखें?

मान्यता है कि दीपक अंधकार दूर करने, शुभता और नई उम्मीद का प्रतीक है। इसीलिए दिवाली की रात घर के अलग-अलग हिस्सों में रोशनी की जाती है।

अगर आप अपने घर में 13 दीपक जलाना चाहते हैं, तो नीचे दी गई व्यवस्था अपना सकते हैं। यह एक आसान घरेलू सुझाव है, कोई अनिवार्य शास्त्रीय क्रम नहीं।

1. मुख्य दरवाजे के दोनों ओर दीपक

सबसे पहले घर के मुख्य दरवाजे पर दो दीपक रख सकते हैं। एक दाईं ओर और दूसरा बाईं ओर।

कई परिवारों में मुख्य द्वार पर दीपक जलाना शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता में इसे माता लक्ष्मी के स्वागत से जोड़कर देखा जाता है।

लेकिन दीपक ऐसी जगह रखें जहाँ आने-जाने वालों के पैर न लगें। दरवाजे के ठीक बीच में दीपक रखना जरूरी नहीं है।

2. पूजा घर में लक्ष्मी-गणेश के सामने दीपक

तीसरा दीपक अपने पूजा घर में रख सकते हैं।

दिवाली पर लक्ष्मी-गणेश की पूजा करते समय दीपक जलाना कई परिवारों की परंपरा है। इसे श्रद्धा और भक्ति का प्रतीक माना जाता है।

पूजा के लिए जगह पहले से साफ कर लें। फिर दीपक को किसी मजबूत थाली या सुरक्षित आधार पर रखें।

अगर आप पूजा की तैयारी कर रहे हैं, तो दिवाली पर लक्ष्मी-गणेश पूजा की पूरी सामग्री सूची भी देख सकते हैं।

3. तुलसी के पास दीपक

चौथा दीपक तुलसी के पास रख सकते हैं।

हिंदू घरों में तुलसी को श्रद्धा और पवित्रता से जोड़ा जाता है। इसलिए कई परिवारों में त्योहारों के समय तुलसी के पास दीपक जलाने की परंपरा है।

ध्यान रहे, दीपक तुलसी की सूखी पत्तियों या पौधे के बिल्कुल नीचे न रखें। पास में सुरक्षित चबूतरा हो, तो उसका इस्तेमाल करें।

अगर तुलसी का पौधा नहीं है, तो केवल इस वजह से परेशान होने की जरूरत नहीं है।

4. आंगन और घर के खुले हिस्से में दीपक

पांचवां और छठा दीपक घर के आंगन में रख सकते हैं।

अगर आपके घर में आंगन नहीं है, तो कोई सुरक्षित खुली जगह चुन सकते हैं।

यहाँ दो दीपक रखने का उद्देश्य घर को सुंदर ढंग से रोशन करना है। इसे परिवार की खुशहाली और मिल-जुलकर त्योहार मनाने की भावना से भी जोड़ सकते हैं।

बस दीपक तेज हवा और लोगों के आने-जाने वाले रास्ते से दूर रखें।

5. रसोई में सुरक्षित जगह पर दीपक

सातवां दीपक रसोई के किसी सुरक्षित हिस्से में रखा जा सकता है।

हमारे घरों में रसोई का अपना खास महत्व है। यहीं परिवार के लिए भोजन तैयार होता है। इसलिए कुछ लोग दिवाली पर इस जगह भी रोशनी करना पसंद करते हैं।

लेकिन एक जरूरी सावधानी है। दीपक गैस चूल्हे, सिलेंडर, तेल की बोतल, कपड़े और लकड़ी के सामान से दूर रखें।

अगर रसोई छोटी है, तो वहाँ मिट्टी का जलता दीपक रखने के बजाय बिजली वाला दीपक लगाना बेहतर है।

6. पानी रखने की जगह के पास दीपक

आठवां दीपक ऐसी जगह रखा जा सकता है जहाँ परिवार पीने का पानी रखता है।

कुछ घरेलू परंपराओं में जल को जीवन और पवित्रता का प्रतीक माना जाता है। इसी भावना से पानी रखने की जगह को साफ और सम्मानपूर्वक सजाया जाता है।

हालांकि, पानी के पास दीपक जलाना सभी हिंदू परिवारों का अनिवार्य नियम नहीं है।

अगर वहाँ जगह कम है, तो जलता दीपक रखने की जरूरत नहीं। बिजली की सजावटी रोशनी भी इस्तेमाल कर सकते हैं।

7. तिजोरी या धन रखने वाली जगह के पास दीपक

नौवां दीपक धन रखने वाली जगह के पास रखने का विकल्प भी है।

दिवाली का त्योहार माता लक्ष्मी की पूजा से जुड़ा है। इसीलिए कुछ घरों में तिजोरी या धन रखने की जगह को साफ करके सजाया जाता है।

मान्यता है कि धन का सम्मान करना और उसका सही उपयोग करना भी शुभ भावना का हिस्सा है।

लेकिन ध्यान रखिए, जलता दीपक अलमारी के अंदर या नोटों और कागजों के पास बिल्कुल न रखें।

यदि सुरक्षित जगह नहीं है, तो वहाँ केवल बिजली की रोशनी करें।

8. खिड़की या बालकनी में दीपक

दसवां और ग्यारहवां दीपक बालकनी या खिड़की के पास सुरक्षित जगह पर रखा जा सकता है।

दिवाली की रात घर की बाहरी सजावट में दीपकों का खास आकर्षण होता है। छोटे-छोटे दीये पूरे घर को सुंदर बना देते हैं।

लेकिन दीये खिड़की की संकरी मुंडेर या ऊँची रेलिंग पर न रखें। इनके गिरने से दुर्घटना हो सकती है।

अगर घर ऊँची इमारत में है या हवा तेज चल रही है, तो बिजली की सुरक्षित रोशनी चुनना बेहतर है।

9. घर की अन्य सुरक्षित जगहों पर अंतिम दो दीपक

बारहवां और तेरहवां दीपक घर की बाकी सुरक्षित जगहों पर रख सकते हैं।

उदाहरण के लिए, बैठक में पूजा के पास बनी किसी सुरक्षित जगह या खुले बरामदे में।

इन दीपकों को घर में उजाला और खुशी फैलाने की भावना से जोड़ सकते हैं।

ध्यान रहे, यह केवल 13 दीयों को सजाने का एक उदाहरण है। किसी विशेष कोने में दीपक न रखने से दुर्भाग्य आएगा, ऐसा मानने की जरूरत नहीं है।

13 दीपकों की आसान व्यवस्था इस तरह याद रख सकते हैं:

  • मुख्य दरवाजे पर 2 दीपक
  • पूजा घर में 1 दीपक
  • तुलसी के पास 1 दीपक
  • आंगन में 2 दीपक
  • रसोई की सुरक्षित जगह पर 1 दीपक
  • पानी रखने की जगह के पास 1 दीपक
  • तिजोरी के पास सुरक्षित स्थान पर 1 दीपक
  • खिड़की या बालकनी में 2 दीपक
  • घर की अन्य सुरक्षित जगहों पर 2 दीपक

इस तरह कुल 13 दीपक हो जाते हैं। हालांकि, जरूरत और सुरक्षा के हिसाब से इनकी संख्या कम या ज्यादा कर सकते हैं।

10. आखिर 13 दीयों की परंपरा का क्या महत्व है?

अब आपके मन में एक सवाल जरूर होगा। जब दिवाली पर इतने सारे दीपक जलाए जाते हैं, तो 13 दीयों की बात अलग से क्यों होती है?

दरअसल, 13 दीपक जलाने की लोकमान्यता धनतेरस से भी जुड़ी हुई है। कुछ परिवार धनतेरस पर 13 दीये जलाते हैं। वहीं, कई घरों में यम दीपदान की अलग परंपरा निभाई जाती है।

धनतेरस पर यमराज के निमित्त दीपक रखने की मान्यता भी प्रचलित है। लेकिन इसे असमय मृत्यु से निश्चित सुरक्षा देने वाला उपाय समझना सही नहीं होगा।

यहाँ सबसे जरूरी अंतर समझिए।

  • धार्मिक मान्यता: दीपक को शुभता, श्रद्धा और प्रकाश का प्रतीक माना जाता है।
  • लोकपरंपरा: कुछ परिवारों में 13 दीये जलाने की प्रथा है।
  • व्यावहारिक बात: दीपकों की संख्या से ज्यादा जरूरी है कि उन्हें सुरक्षित जगह रखा जाए।

इसलिए अगर आपके घर में 5, 11 या 21 दीपक जलाने की परंपरा है, तो केवल संख्या बदलने की जरूरत नहीं है।

दिवाली 2026 कब है? दीपक जलाने से पहले ये तारीखें जान लें

मां और बेटी दिवाली की पूजा के लिए लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियों के पास दीपक, फूल और चावल की थाली तैयार करती हुई।
दिवाली 2026 कब है? दीपक जलाने से पहले ये तारीखें जान लें

इस साल दिवाली से जुड़े प्रमुख त्योहारों की तारीखें इस प्रकार हैं।

त्योहारतारीखप्रदोष काल
धनतेरस6 नवंबर 2026, शुक्रवार17:45–20:09
नरक चतुर्दशी (छोटी दिवाली)8 नवंबर 2026, रविवार—
दीपावली (लक्ष्मी पूजन)8 नवंबर 2026, रविवार17:44–20:08
गोवर्धन पूजा9 नवंबर 2026, सोमवार—
भाई दूज11 नवंबर 2026, बुधवार—

ये समय उज्जैन के अनुसार हैं। स्थानीय पंचांग के अनुसार समय में थोड़ा अंतर हो सकता है।

कुछ पंचांगों में दीपावली के लिए 9 नवंबर 2026, सोमवार और 10 नवंबर 2026, मंगलवार की तारीखें भी दी गई हैं। इसी तरह गोवर्धन पूजा के लिए कुछ पंचांगों में 10 नवंबर 2026, मंगलवार का उल्लेख मिलता है।

दीपक जलाने की तैयारी करते समय अपने परिवार की पूजा परंपरा और स्थानीय पंचांग का ध्यान रख सकते हैं।

11. दीपक जलाते समय ये गलतियां भूलकर भी न करें

दिवाली पर दीपक जलाना सुंदर परंपरा है। लेकिन जरा-सी लापरवाही परेशानी बढ़ा सकती है।

इसलिए इन बातों का खास ध्यान रखें।

  • दीपक पर्दों, कागज, प्लास्टिक और कपड़ों से दूर रखें।
  • दीये को समतल और मजबूत जगह पर रखें।
  • जलते दीपक में तेल डालते समय सावधानी बरतें।
  • बच्चों और पालतू जानवरों की पहुँच से दीपक दूर रखें।
  • सीढ़ियों, दरवाजों के बीच और चलने वाले रास्तों में दीपक न रखें।
  • सोने से पहले और घर से बाहर निकलने से पहले सभी जलते दीपक बुझा दें।
  • बालकनी की बाहरी रेलिंग पर दीपक रखने से बचें।

सरकारी अग्नि-सुरक्षा सलाह भी जलते दीयों को ज्वलनशील वस्तुओं से दूर रखने और उन्हें बिना निगरानी के न छोड़ने पर जोर देती है।

एक और बात। कुछ लोग मानते हैं कि दिवाली की पूरी रात दीपक जलते रहना चाहिए। लेकिन केवल इस मान्यता के कारण आग का खतरा लेना सही नहीं है।

12. क्या दिवाली पर घी का दीपक ही जलाना चाहिए?

बहुत से लोग यह भी पूछते हैं कि दिवाली पर घी का दीपक जलाएं या तेल का?

अलग-अलग परिवारों में दोनों तरह की परंपराएं मिलती हैं। कोई पूजा घर में घी का दीपक जलाता है, तो कोई तेल के दीपक का उपयोग करता है।

इसमें अपने परिवार की परंपरा को महत्व दे सकते हैं।

दीपक में इस्तेमाल होने वाली सामग्री साफ रखें। साथ ही उसे ऐसी जगह रखें जहाँ गिरने या आग फैलने की आशंका न हो।

अगर आप सभी दीपक मिट्टी के नहीं जला सकते, तो परेशान न हों। कुछ पारंपरिक दीयों के साथ सुरक्षित बिजली की सजावट भी कर सकते हैं।

श्रद्धा दिखाने के लिए बहुत अधिक दीपक जलाना जरूरी नहीं है।

13. अगर 13 दीये पूरे नहीं जला पाए तो क्या होगा?

मान लीजिए, आपके घर में जगह कम है। या छोटे बच्चे हैं और आप केवल कुछ ही दीपक जलाना चाहते हैं।

तो क्या इससे आपकी दिवाली की पूजा अधूरी रह जाएगी?

केवल 13 दीये पूरे न होने से पूजा अधूरी मानी जाएगी, ऐसा कोई प्रमाण यहाँ उपलब्ध नहीं है।

कुछ घरों में बहुत सारे दीपक जलते हैं। कहीं पूजा घर और दरवाजे पर ही दीपक रखे जाते हैं। परिवारों और क्षेत्रों के अनुसार परंपराएं अलग हो सकती हैं।

इसलिए अपनी सुविधा, सुरक्षा और श्रद्धा के हिसाब से दीपक जलाएं।

दिवाली पर घर में साफ-सफाई, परिवार के साथ पूजा और प्रेम से त्योहार मनाना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

एक छोटी-सी बात याद रखिए: दिवाली के 13 दीये जलाना चाहते हैं तो जरूर जलाएं, लेकिन किसी संख्या या जगह को लेकर डर मन में न रखें। दीपक का असली संदेश है अंधकार से प्रकाश की ओर बढ़ना।

जब घर में श्रद्धा के साथ खुशी, अपनापन और सुरक्षित रोशनी हो, तो त्योहार की सुंदरता अपने आप बढ़ जाती है।

अधिक जानकारी के लिए: gidm.gujarat.gov.in

लेखक: contentstudio_Editor

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