गोवर्धन पूजा के दिन घर में गोवर्धन पर्वत कैसे बनाएं और पूजा की विधि क्या है?
गोवर्धन पूजा के दिन घर के आंगन में या मुख्य द्वार पर गोबर से गोवर्धन पर्वत की आकृति बनाई जाती है और फिर विधि-विधान से उनकी पूजा की जाती है। इस दिन भगवान कृष्ण और प्रकृति की पूजा का विशेष महत्व होता है। गोवर्धन पूजा: क्यू करते है? जाने पूजा विधि, कथा महत्व लेख में आपको इसकी पौराणिक कथा के बारे में भी पूरी जानकारी मिल जाएगी।
गोवर्धन पूजा 2026 की तिथि और समय
आप जानना चाहते होंगे कि इस साल गोवर्धन पूजा किस दिन है, तो पंचांग के अनुसार इसकी सही तारीख नीचे दी गई है। स्थानीय पंचांग के अनुसार समय में थोड़ा अंतर हो सकता है।
| त्योहार का नाम | तिथि | समय / मुहूर्त |
|---|---|---|
| गोवर्धन पूजा | 9 नवंबर 2026, सोमवार | सूर्योदय 06:36, सूर्यास्त 17:44 (कुछ पंचांगों में 10 नवंबर 2026 भी) |
घर में गोवर्धन पर्वत कैसे बनाएं?
गोवर्धन पूजा के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद घर के साफ-सुथरे आंगन या मुख्य द्वार पर गाय के गोबर से गोवर्धन पर्वत की आकृति बनाई जाती है।
मान्यता है कि गोबर से पर्वत बनाते समय उसमें लेटे हुए भगवान कृष्ण की आकृति भी बनाई जाती है। इस पर्वत के पास ही गोबर से ही ग्वाल-बाल, बछड़े और गायों की आकृतियां भी बनाई जाती हैं। इसे और सुंदर रूप देने के लिए इसमें घास, फूल और गेंदे के फूलों का इस्तेमाल किया जाता है।
गोवर्धन पूजा की सरल विधि क्या है?

जब आप घर में गोवर्धन पर्वत बना लें, तो शाम के समय इसकी पूजा की जाती है। आइए जानते हैं कि पूजा किस तरह से करनी चाहिए:
- सबसे पहले गोवर्धन पर्वत को धूप, दीप, रोली, अक्षत (चावल), और पुष्प अर्पित करें।
- इसके बाद उन्हें जल अर्पित करें।
- पूजा में खीर, बताशे, मिठाई और घर पर बने विभिन्न पकवानों (अन्नाकूट) का भोग लगाएं।
- पूजा के बाद गोवर्धन पर्वत की सात बार परिक्रमा की जाती है। परिक्रमा करते समय हाथ में जौ या कच्चे सूत का धागा लेकर पर्वत के चारों ओर घुमाया जाता है।
- परिक्रमा पूरी होने के बाद भगवान से अपने परिवार की सुख-शांति और समृद्धि की प्रार्थना करें।
गोवर्धन पूजा का महत्व क्यों है?
आपके मन में यह सवाल जरूर आ रहा होगा कि हम हर साल गोवर्धन पूजा क्यों करते हैं। मान्यता है कि भगवान कृष्ण ने ब्रजवासियों को इंद्र के अहंकार से बचाने के लिए अपनी उंगली पर गोवर्धन पर्वत उठाया था। तभी से प्रकृति और गोवंश के प्रति आभार प्रकट करने के लिए यह त्योहार मनाया जाता है। इस दिन गायों की भी विशेष रूप से सेवा और पूजा की जाती है।



