गर्भवती, बीमार और मासिक धर्म के दौरान हरतालिका तीज का व्रत कैसे करें?

Roshani

September 9, 2026

हरतालिका तीज पर शिव पार्वती की पूजा करती भारतीय महिला

हरतालिका तीज भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित आस्था का पावन पर्व है। विवाहित महिलाएं सुखी वैवाहिक जीवन और अखंड सौभाग्य की कामना से, तथा अविवाहित युवतियां मनचाहे जीवनसाथी की प्रार्थना के साथ यह व्रत रखती हैं।

लेकिन गर्भावस्था, बीमारी या मासिक धर्म के समय मन में कई स्वाभाविक प्रश्न आते हैं—क्या निर्जला व्रत रखना जरूरी है? दवा लेने से व्रत टूटेगा? पूजा न कर पाएं तो क्या व्रत अधूरा रह जाएगा?

सबसे पहले यह याद रखें: व्रत का अर्थ शरीर को कष्ट देना नहीं है। व्रत का मूल भाव श्रद्धा, संयम और भगवान शिव-माता पार्वती का स्मरण है। अपनी सेहत की उपेक्षा करना किसी भी परिस्थिति में उचित नहीं है।

गर्भवती महिलाएं हरतालिका तीज का व्रत कैसे करें?

गर्भावस्था में मां के साथ गर्भ में पल रहे शिशु का पोषण और स्वास्थ्य भी महत्वपूर्ण होता है। इसलिए केवल परंपरा या किसी के दबाव में निर्जला उपवास करना आवश्यक नहीं है।

व्रत रखने की इच्छा हो तो पहले अपने स्त्री-रोग विशेषज्ञ की सलाह लें। डॉक्टर आपकी गर्भावस्था की अवस्था, स्वास्थ्य, दवाओं और पोषण की जरूरत के अनुसार बेहतर मार्गदर्शन दे सकते हैं। डॉक्टर की अनुमति हो तो आप अपनी क्षमता के अनुसार फलाहार व्रत रख सकती हैं।

  • पानी, नारियल पानी, दूध या डॉक्टर द्वारा अनुमत पेय थोड़े-थोड़े अंतराल पर लें।
  • जरूरत होने पर फल, सूखे मेवे या हल्का सात्त्विक भोजन लें।
  • लंबे समय तक खड़े रहकर पूजा न करें; बैठकर छोटी और सरल पूजा करें।
  • देर रात तक जागने और अत्यधिक थकान से बचें।

पूजा के समय मन ही मन कह सकती हैं:
“हे माता पार्वती, मैं अपने और अपने गर्भस्थ शिशु के स्वास्थ्य की रक्षा करते हुए अपनी क्षमता के अनुसार यह व्रत कर रही हूं। कृपया मेरी श्रद्धा स्वीकार करें।”

यदि चक्कर, अत्यधिक कमजोरी, उल्टी, तेज सिरदर्द, घबराहट या असामान्य परेशानी हो, तो तुरंत व्रत रोकें, पानी या आवश्यक आहार लें और डॉक्टर से संपर्क करें। ऐसा करना व्रत का अनादर नहीं, बल्कि जिम्मेदारी है।

बीमार महिलाएं व्रत कैसे रखें?

मधुमेह, लो ब्लड प्रेशर, एनीमिया, माइग्रेन, हृदय या किडनी की बीमारी जैसी स्थिति में, अथवा नियमित दवा चल रही हो तो डॉक्टर की सलाह के बिना उपवास न करें। दवा बंद करना या उसका समय बदलना भी सही नहीं है।

यदि आप भूखी नहीं रह सकतीं, तो भक्ति का स्वरूप बदल सकती हैं।

  • अन्न त्याग के बजाय किसी एक प्रिय वस्तु का त्याग करें।
  • उस दिन क्रोध, कटु वचन और किसी की निंदा से बचने का संकल्प लें।
  • “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का अपनी क्षमता के अनुसार जप करें।
  • किसी जरूरतमंद को फल, भोजन, वस्त्र या उपयोगी वस्तु दान करें।
  • हरतालिका तीज की कथा सुनें और मन से प्रार्थना करें।

भगवान आपके मन की भावना देखते हैं। बीमारी में पर्याप्त भोजन, पानी और दवा लेना स्वास्थ्य की जरूरत है, दोष नहीं।

मासिक धर्म के दौरान हरतालिका तीज में क्या करें?

मासिक धर्म एक प्राकृतिक शारीरिक प्रक्रिया है। इसे लेकर डर, अपराधबोध या स्वयं को अपवित्र मानने की आवश्यकता नहीं है। पूजा से जुड़े नियम अलग-अलग परिवारों और परंपराओं में अलग हो सकते हैं, इसलिए अपने विश्वास और घर की परंपरा के अनुसार निर्णय लें।

यदि आपके घर में इस दौरान पूजा की अनुमति है, तो स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें और अपनी क्षमता के अनुसार शिव-पार्वती की पूजा करें। यदि पारिवारिक परंपरा में मूर्ति या पूजा-सामग्री को स्पर्श नहीं किया जाता, तो दूर बैठकर मानसिक पूजा की जा सकती है।

आप भगवान शिव और माता पार्वती का ध्यान कर सकती हैं, हरतालिका तीज की कथा सुन सकती हैं और “ॐ नमः शिवाय” का जप कर सकती हैं। चाहें तो परिवार की किसी अन्य महिला से प्रसाद और पूजन सामग्री अर्पित करवा सकती हैं।

पीरियड्स के दौरान तेज दर्द, कमजोरी या अधिक रक्तस्राव हो तो निर्जला व्रत न करें। पर्याप्त आराम, पानी और जरूरत के अनुसार भोजन लेना सबसे जरूरी है।

क्या फलाहार या पूजा न कर पाने से व्रत अधूरा माना जाएगा?

नहीं। स्वास्थ्य संबंधी मजबूरी में व्रत का स्वरूप बदलने, फलाहार लेने या शारीरिक रूप से पूजा न कर पाने से आपकी सच्ची श्रद्धा कम नहीं होती। इस दिन आप ये तीन सरल काम कर सकती हैं:

  1. भगवान शिव और माता पार्वती का शांत मन से ध्यान करें।
  2. अपनी क्षमता के अनुसार “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जप करें।
  3. किसी जरूरतमंद की सहायता करें या दान दें।

यही भावना हरतालिका तीज को सार्थक बनाती है।

एक जरूरी बात

गर्भावस्था, बीमारी और दवाओं से संबंधित हर व्यक्ति की स्थिति अलग हो सकती है। इसलिए इस लेख को सामान्य जानकारी के रूप में लें और अपनी व्यक्तिगत स्वास्थ्य-स्थिति के लिए डॉक्टर की सलाह को प्राथमिकता दें।

इस हरतालिका तीज पर भगवान शिव और माता पार्वती से अपने परिवार के स्वास्थ्य, प्रेम, शांति और सुख की प्रार्थना करें। श्रद्धा रखें, लेकिन अपने शरीर की आवाज भी सुनें।

हर हर महादेव।

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