छठ पूजा 2026 में सबसे ज़्यादा पूछा जाने वाला सवाल यही होता है कि डूबते सूर्य और उगते सूर्य को अलग-अलग अर्घ्य क्यों दिया जाता है? अगर आप भी पहली बार छठ कर रहे हैं या तैयारी को लेकर थोड़े उलझन में हैं, तो आसान भाषा में सब समझ लेते हैं।
मान्यता है कि छठ पूजा में सूर्यदेव और छठी मैया की आराधना के माध्यम से प्रकृति, जीवन, स्वास्थ्य और परिवार की खुशहाली के लिए प्रार्थना की जाती है। संध्या अर्घ्य डूबते सूर्य को और उषा अर्घ्य उगते सूर्य को दिया जाता है। दोनों अर्घ्यों का अपना अलग भाव और महत्व माना जाता है।
| जानकारी | विवरण |
|---|---|
| छठ पूजा | 15 नवंबर 2026, रविवार |
| तिथि (सूर्योदय के समय) | शुक्ल षष्ठी |
| सूर्योदय | 06:40 |
| सूर्यास्त | 17:42 |
| कुछ पंचांगों में | 16 नवंबर 2026, सोमवार |
स्थानीय पंचांग के अनुसार समय में थोड़ा अंतर हो सकता है।
मान्यता है कि छठ पूजा हमें केवल उगती सफलता ही नहीं, बल्कि अस्त होते समय भी कृतज्ञ रहने का संदेश देती है। यही कारण है कि डूबते और उगते दोनों सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है।
डूबते और उगते सूर्य को अर्घ्य देने के पीछे क्या भाव माना जाता है?

संध्या अर्घ्य: दिन भर के आशीर्वाद के लिए धन्यवाद
छठ पूजा के चौथे दिन संध्या अर्घ्य दिया जाता है। इस समय सूर्य अस्त होने की ओर होते हैं। मान्यता है कि यह अर्घ्य जीवन में मिले सुख, अवसर और संरक्षण के लिए कृतज्ञता व्यक्त करने का प्रतीक है।
हम अक्सर केवल मिलने वाली चीज़ों पर ध्यान देते हैं। लेकिन छठ का संदेश यह भी है कि जीवन के हर चरण का सम्मान किया जाए। इसलिए अस्त होते सूर्य को भी प्रणाम किया जाता है।
उषा अर्घ्य: नई शुरुआत की प्रार्थना
अगली सुबह उगते सूर्य को उषा अर्घ्य दिया जाता है। यह नए दिन, नई आशा और नई ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है।
मान्यता है कि इस समय श्रद्धालु अपने परिवार, बच्चों, स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना करते हैं। इस अर्घ्य के साथ छठ व्रत का मुख्य अनुष्ठान पूर्ण माना जाता है।
दोनों अर्घ्यों में सबसे बड़ा अंतर
| संध्या अर्घ्य | उषा अर्घ्य |
|---|---|
| डूबते सूर्य को दिया जाता है | उगते सूर्य को दिया जाता है |
| कृतज्ञता और धन्यवाद का भाव | नई शुरुआत और मंगल कामना का भाव |
| सूर्यास्त के समय | सूर्योदय के समय |
| छठ की संध्या पूजा का मुख्य भाग | व्रत पूर्ण होने से पहले का महत्वपूर्ण चरण |
क्या दोनों अर्घ्यों की सामग्री अलग होती है?
आमतौर पर नहीं। अधिकांश परिवार दोनों अर्घ्यों में लगभग समान पूजा सामग्री का उपयोग करते हैं। क्षेत्रीय परंपराओं के अनुसार कुछ अंतर हो सकते हैं।
यदि आपने पहले किसी पूजा की सामग्री सूची तैयार की है, तो आपको हमारी दिवाली पूजा सामग्री सूची भी उपयोगी लग सकती है, क्योंकि उसमें भी पूजा की तैयारी को व्यवस्थित रखने के आसान तरीके बताए गए हैं।
छठ पूजा की जरूरी सामग्री चेकलिस्ट
तैयारी पहले से कर लें तो अंतिम समय की भागदौड़ कम हो जाती है।
- सूप या दउरा
- बाँस की टोकरी
- दीपक
- फल (क्षेत्रीय परंपरा के अनुसार)
- नारियल
- गन्ना
- ठेकुआ और अन्य पारंपरिक प्रसाद
- पूजा के लिए साफ वस्त्र
- अर्घ्य देने का पात्र
- जल
- दूध (जहाँ परंपरा में उपयोग होता हो)
संध्या अर्घ्य और उषा अर्घ्य की तैयारी ऐसे करें

एक दिन पहले ही सामग्री व्यवस्थित कर लें
छठ पूजा में साफ-सफाई और शुद्धता का विशेष महत्व माना जाता है। इसलिए पूजा स्थल और सामग्री पहले से तैयार रखें।
प्रसाद समय पर तैयार करें
कई घरों में ठेकुआ और अन्य प्रसाद पहले से बनाए जाते हैं। परिवार के सभी सदस्य मिलकर तैयारी करें तो काम भी आसान हो जाता है और पूजा का भाव भी बढ़ता है।
घाट जाने से पहले सूची दोबारा जांच लें
अक्सर नारियल, दीपक या जल पात्र जैसी चीजें छूट जाती हैं। घर से निकलने से पहले एक छोटी चेकलिस्ट देख लेना मददगार रहता है।
बच्चों और बुजुर्गों का ध्यान रखें
यदि घाट पर भीड़ हो तो परिवार के छोटे बच्चों और बुजुर्गों की सुविधा का पहले से ध्यान रखें। यह एक व्यावहारिक और जरूरी बात है।
श्रद्धा पर ध्यान दें, दिखावे पर नहीं
छठ पूजा की सबसे बड़ी खूबसूरती इसकी सादगी है। मान्यता है कि पूजा की भव्यता से अधिक महत्व श्रद्धा और नियमों का होता है।
छठ जैसे पर्व हमें प्रकृति और सूर्य के प्रति आभार व्यक्त करना सिखाते हैं। जैसे गोवर्धन पूजा के महत्व में प्रकृति और संरक्षण का संदेश मिलता है, वैसे ही छठ पूजा भी प्रकृति से जुड़ने का अवसर देती है। इसी तरह देवशयनी एकादशी जैसे व्रतों में भी संयम और श्रद्धा को महत्व दिया जाता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या संध्या अर्घ्य और उषा अर्घ्य दोनों देना जरूरी माना जाता है?
परंपरागत छठ पूजा में दोनों अर्घ्य महत्वपूर्ण माने जाते हैं। हालांकि परिवार और क्षेत्र की परंपराओं के अनुसार पालन के तरीके अलग हो सकते हैं।
छठ पूजा में केवल उगते सूर्य को अर्घ्य क्यों नहीं दिया जाता?
मान्यता है कि छठ पूजा जीवन के दोनों पक्षों, उपलब्धि और विनम्रता, को स्वीकार करने का संदेश देती है। इसलिए डूबते और उगते दोनों सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है।
क्या पूजा की सामग्री हर जगह एक जैसी होती है?
नहीं। मूल सामग्री लगभग समान रहती है, लेकिन अलग-अलग राज्यों और परिवारों में कुछ वस्तुएँ अलग हो सकती हैं।
पहली बार छठ पूजा कर रहे हैं तो क्या ध्यान रखें?
घर की परंपरा, स्थानीय रीति और परिवार के बुजुर्गों से मार्गदर्शन लें। तैयारी पहले से कर लें और सामग्री समय पर जुटा लें।
छठ पूजा का मूल भाव सूर्यदेव के प्रति सम्मान, प्रकृति के प्रति कृतज्ञता और परिवार के मंगल की प्रार्थना है। संध्या अर्घ्य और उषा अर्घ्य दोनों मिलकर इस पर्व को पूर्ण बनाते हैं।



