दिवाली का पावन पर्व रोशनी, उल्लास और मां लक्ष्मी के स्वागत का अवसर होता है। इस दिन घर के कोने-कोने को दीपों से जगमगाया जाता है, लेकिन मुख्य द्वार पर जलाए जाने वाले दीपक का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व होता है। मान्यता है कि मुख्य द्वार पर जलाया गया दीपक नकारात्मक ऊर्जा को दूर रखता है और माता लक्ष्मी का घर में प्रवेश सुगम बनाता है। आइए विस्तार से जानते हैं कि मुख्य दरवाजे पर कौन सा दीपक जलाना चाहिए और उसकी सही दिशा क्या होनी चाहिए।
मुख्य दरवाजे पर कौन सा दीपक जलाना चाहिए?
दिवाली की रात मुख्य द्वार पर साधारण तेल के छोटे दीयों के अलावा एक विशेष मुख्य दीपक जलाया जाता है।
- शुद्ध घी का दीपक: शास्त्रों के अनुसार, देवताओं के पूजन और मां लक्ष्मी के स्वागत के लिए गाय के शुद्ध घी का दीपक सबसे उत्तम माना जाता है। घी का दीपक सात्विकता और सकारात्मकता का प्रतीक है।
- चौमुखी या बड़ा दीपक: मुख्य दरवाजे पर आप आटे का या मिट्टी का एक बड़ा दीपक रख सकते हैं, जिसमें चार बत्तियां जलाई जाती हैं (चौमुखी दीपक)। मान्यता है कि चौमुखी दीपक चारों दिशाओं से नकारात्मक ऊर्जा को रोकता है और घर में सुख-समृद्धि का आगमन कराता है।
- तिल के तेल का विकल्प: यदि घी का दीपक संभव न हो, तो आप शुद्ध तिल के तेल का दीपक भी जला सकते हैं। ध्यान रखें कि दीपक खंडित (टूटा हुआ) नहीं होना चाहिए।
दीपक जलाने की सही दिशा और स्थान

दीपक की दिशा और उसका स्थान उसका प्रभाव तय करता है। इसलिए इसे रखते समय कुछ नियमों का ध्यान रखना आवश्यक है:
- सही स्थान: परंपरा में मुख्य द्वार के दोनों ओर दीपक रखना अधिक प्रचलित है। एक ही दीपक रखना हो, तो अपने परिवार की परंपरा के अनुसार स्थान चुन सकते हैं। इसे जमीन पर सीधे न रखकर किसी साफ पटरे, चावल की ढेरी या थोड़े से फूलों के आसन पर रखना चाहिए।
- दीपक की लौ की दिशा: दीपक का मुख किस ओर हो, इसे लेकर अलग-अलग मान्यताएं हैं। सामान्यतः दीपक का मुख पूर्व दिशा (सूर्य की दिशा, जो सकारात्मकता लाती है) या उत्तर दिशा (कुबेर की दिशा, जो धन और समृद्धि की प्रतीक है) की ओर होना चाहिए।
- अंधेरा न हो: ध्यान रखें कि दिवाली की पूरी रात मुख्य द्वार पर प्रकाश रहना चाहिए। रात के समय मुख्य द्वार को अंधेरे में नहीं रखना चाहिए।
दिवाली और आसपास के पर्वों का पंचांग और समय
स्थानीय पंचांग के अनुसार समय में थोड़ा अंतर हो सकता है। मुख्य तिथियां और मुहूर्त इस प्रकार हैं:
| पर्व / तिथि | तिथि (सूर्योदय के समय) | सूर्योदय व सूर्यास्त | विशेष मुहूर्त / समय |
|---|---|---|---|
| धनतेरस (6 नवंबर 2026, शुक्रवार) | कृष्ण द्वादशी | सूर्योदय 06:34, सूर्यास्त 17:45 | प्रदोष काल 17:45–20:09 |
| दीपावली (लक्ष्मी पूजन) (8 नवंबर 2026, रविवार) | कृष्ण चतुर्दशी | सूर्योदय 06:35, सूर्यास्त 17:44 | प्रदोष काल 17:44–20:08 |
| नरक चतुर्दशी (छोटी दिवाली) (8 नवंबर 2026, रविवार) | कृष्ण चतुर्दशी | सूर्योदय 06:35, सूर्यास्त 17:44 | — |
| भाई दूज (11 नवंबर 2026, बुधवार) | शुक्ल द्वितीया | सूर्योदय 06:37, सूर्यास्त 17:43 | — |
मुख्य द्वार पर दीपक जलाते समय ध्यान रखने योग्य बातें

लोकपरंपरा और वास्तु के अनुसार कुछ छोटी लेकिन महत्वपूर्ण बातों का ध्यान रखना चाहिए:
- स्वच्छता: दीपक जलाने से पहले मुख्य द्वार और उसके आसपास की जगह पूरी तरह साफ होनी चाहिए। गंदी जगह पर दीपक रखना अशुभ माना जाता है।
- रंगोली और बंधनवार: मुख्य द्वार पर साफ-सुथरी रंगोली बनाएं और आम या अशोक के पत्तों का तोरण (बंधनवार) लगाएं। इससे मां लक्ष्मी का स्वागत होता है।
- दीपक बुझने न दें: कोशिश करें कि मुख्य द्वार का मुख्य दीपक कम से कम देर रात तक या पूरी रात प्रज्वलित रहे। इसके लिए बीच-बीच में घी या तेल की मात्रा की जांच करते रहें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
क्या मुख्य दरवाजे पर एक ही दीपक जलाना चाहिए?
मान्यता है कि मुख्य द्वार पर कम से कम एक बड़ा या चौमुखी दीपक जरूर जलाना चाहिए। इसके अलावा आप अपनी श्रद्धा अनुसार द्वार के दोनों कोनों पर छोटे दीपक भी सजा सकते हैं।
क्या मुख्य दरवाजे पर रखी दीपक की बत्ती दक्षिण दिशा की ओर हो सकती है?
दक्षिण दिशा को यम की दिशा माना जाता है, इसलिए सामान्यतः पूजा या मुख्य द्वार के दीपक का मुख दक्षिण दिशा की ओर नहीं रखा जाता है। दीपक का मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर होना ही सबसे उत्तम माना जाता है।
क्या आटे का दीपक मुख्य द्वार पर जलाना सही है?
हां, लोकपरंपराओं के अनुसार आटे का दीपक बहुत पवित्र माना जाता है। आप गूंथे हुए आटे से दीपक बनाकर उसमें घी या तेल डालकर मुख्य द्वार पर प्रज्वलित कर सकते हैं।
इस विषय पर और लेख पढ़ें: त्योहार एवं व्रत



