लक्ष्मी पूजन के लिए आवश्यक सामग्री क्या है और पूजा की तैयारी किस क्रम में करनी चाहिए?
दीपावली के दिन महालक्ष्मी और श्रीगणेश पूजन के लिए चौकी, लाल वस्त्र, रोली, अक्षत, कलश, आम के पत्ते, नारियल, ताजे फूल, फल, धूप-दीप, नैवेद्य (बताशे, मिठाई), और खील-बताशे की मुख्य रूप से आवश्यकता होती है। पूजा की शुरुआत सबसे पहले स्थान की शुद्धि, चौकी सजाने, कलश स्थापना और फिर गणपति एवं माता लक्ष्मी के पूजन क्रम से की जाती है।
दीपावली पूजन का शुभ मुहूर्त और समय (2026)
मान्यता है कि प्रदोष काल और निशीथ काल में लक्ष्मी पूजन करने से घर मेंार में स्थिरता और समृद्धि का वास होता है। उज्जैन के सूर्योदय और सूर्यास्त के आधार पर दीपावली 2026 का मुख्य मुहूर्त इस प्रकार रहेगा:
| पर्व / तिथि | तिथि (सूर्योदय के समय) | सूर्योदय / सूर्यास्त | प्रदोष काल / विशेष समय |
|---|---|---|---|
| धनतेरस (6 नवंबर 2026) | कृष्ण द्वादशी | 06:34 / 17:45 | 17:45–20:09 |
| दीपावली / लक्ष्मी पूजन (8 नवंबर 2026) | कृष्ण चतुर्दशी | 06:35 / 17:44 | 17:44–20:08 |
| नरक चतुर्दशी (8 नवंबर 2026) | कृष्ण चतुर्दशी | 06:35 / 17:44 | – |
| गोवर्धन पूजा (10 नवंबर 2026) | शुक्ल प्रतिपदा | 06:37 / 17:44 | (कुछ पंचांगों में 9 नवंबर को भी) |
| भाई दूज (11 नवंबर 2026) | शुक्ल द्वितीया | 06:37 / 17:43 | – |
स्थानीय पंचांग के अनुसार समय में थोड़ा अंतर हो सकता है।
लक्ष्मी-गणेश पूजा के लिए आवश्यक सामग्री सूची

पूजा में किसी वस्तु की कमी न रहे, इसके लिए एक दिन पहले ही सभी सामग्रियों को एकत्रित कर लेना चाहिए। पूजन सामग्री की मुख्य सूची नीचे दी गई है:
- वेदी या चौकी: एक साफ चौकी और उसपर बिछाने के लिए लाल या पीला वस्त्र।
- मूर्तियां: श्रीगणेश और माता लक्ष्मी की नई या साफ की हुई प्रतिमाएं या चित्र।
- कलश स्थापना: तांबे या पीतल का कलश, गंगाजल, शुद्ध जल, सुपारी, सिक्का, आम या अशोक के 5 पत्ते, और कलश पर रखने के लिए ढक्कन में भरे हुए चावल और नारियल।
- पंचांग पूजन सामग्री: रोली, चंदन, हल्दी, अक्षत (साबुत चावल), जनेऊ, कलावा (रक्षा सूत्र), और इत्र।
- पुष्प और माला: ताजे फूल, गुलाब या गेंदे की माला, और दूर्वा (गणेश जी के लिए)।
- दीपक और अग्नि: शुद्ध घी का बड़ा दीपक (अखंड दीये के लिए), तैल (तेल) के छोटे दीपक, रुई की बत्तियां, धूपबत्ती, कपूर, और माचिस।
- नैवेद्य और भोग: खील-बताशे, मिठाइयां (विशेषकर मोदक और बेसन के लड्डू), फल (ऋतुफल), और पान-सुपारी।
- विशेष वस्तुएं: महालक्ष्मी को अर्पित करने के लिए कमल का फूल (यदि उपलब्ध हो), और माता के शृंगार की वस्तुएं।
पूजा से पहले घर और वेदी की तैयारी कैसे करें?
दीपावली के दिन प्रातःकाल उठकर स्नान आदि से निवृत्त होकर पूरे घर की साफ-सफाई करनी चाहिए। मान्यता है कि स्वच्छ वातावरण में ही लक्ष्मी का आगमन होता है।
संध्याकाल के समय पूजा स्थल पर एक साफ चौकी रखें और उसपर लाल वस्त्र बिछाएं। चौकी के बाईं ओर (अपने दाहिने हाथ की तरफ) चावल की ढेरी पर कलश स्थापित करें। कलश में जल, सुपारी, सिक्का और आम के पत्ते रखकर ऊपर नारियल रखें। कलश के पास ही चावल से अष्टदल बनाकर उसपर माता लक्ष्मी और श्रीगणेश की मूर्तियां इस प्रकार रखें कि उनका मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर हो। गणेश जी को दाईं ओर और लक्ष्मी जी को उनके बाईं ओर स्थापित करना चाहिए।
पूजन का सही क्रम और विधि

पूजा की शुरुआत सबसे पहले वेदी के शुद्धिकरण और आचमन से की जाती है।
- पवित्रिकरण और आचमन: पूजा करने से पहले अपने ऊपर और वेदी पर जल छिड़ककर पवित्र करें।
- गणेश और कलश पूजन: सबसे पहले भगवान श्रीगणेश का आह्वान करें, उन्हें रोली, अक्षत, दूर्वा और मोदक अर्पित करें। इसके बाद कलश देवता और नवग्रहों का पूजन करें।
- महालक्ष्मी पूजन: इसके बाद माता लक्ष्मी का ध्यान करते हुए उन्हें श्रीसूक्त के पाठ के साथ कमल का फूल, रोली, चंदन, अक्षत, और श्रृंगार सामग्री अर्पित करें।
- दीपक प्रज्वलन: घी का मुख्य दीपक जलाकर उसकी रोली-अक्षत से पूजा करें और माता लक्ष्मी तथा गणेश जी की आरती उतारें।
- भोग और क्षमा प्रार्थना: अंत में खील-बताशे, फल और मिठाइयों का भोग लगाएं। पूजा के अंत में अनजानें में हुई भूलचूक के लिए क्षमा प्रार्थना करें।