🌕 मार्गशीर्ष मास 2025: इस पवित्र माह में करें ये 7 विशेष उपाय और पूजाएँ 🙏
हिंदू पंचांग के अनुसार, मार्गशीर्ष मास (जिसे कुछ जगह “आग्रहायणा” या “अग्रहायण” मास भी कहा जाता है) वर्ष का एक अत्यंत पवित्र और शुभ महीना माना गया है।
श्रीकृष्ण ने भगवद-गिता में स्वयं कहा है “मासानां मार्गशीर्षोऽहम्”, अर्थात् “महीनों में मैं मार्गशीर्ष हूं।”
इसलिए यह महीना स्वयं भगवान विष्णु, श्रीकृष्ण और देवी लक्ष्मी की कृपा पाने का सर्वोत्तम समय है।
मार्गशीर्ष माह में पूजा-अर्चना, दान-पुण्य, व्रत, स्नान और जप-तप का विशेष महत्व होता है।
🌸 मार्गशीर्ष मास में करने योग्य 7 विशेष उपाय
🕉️ 1. श्रीकृष्ण जी की विशेष पूजा करें
प्रत्येक गुरुवार या एकादशी को कृष्ण मंदिर जाएँ। तुलसी का दल, दूध और मिश्री का भोग लगाएं।
📿 मंत्र: “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय”
🌼 2. माता लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए दीपदान करें
हर शुक्रवार संध्या के समय घर के उत्तर-पूर्व कोने में घी का दीपक जलाएं।
सात शुक्रवार लगातार यह क्रिया करने से घर में धन और सुख-शांति बनी रहती है।
🌿 3. तुलसी पूजन और स्नान का विशेष महत्व
सुबह स्नान के बाद तुलसी माता को जल चढ़ाएं, परिक्रमा करें और “ॐ तुलस्यै नमः” मंत्र का जाप करें।
यह उपाय पापों का क्षय करता है और मन को शुद्ध करता है।
🔱 4. भगवान शिव को जल अर्पण करें
सोमवार के दिन शिवलिंग पर गंगाजल, बेलपत्र, दूध और मध अर्पित करें।
यह उपाय जीवन की अड़चनों और आर्थिक संकट को दूर करने में सहायता करता है।
💰 5. दान-धर्म और सेवा करें
इस मास में किया गया दान “अक्षय पुण्य” माना जाता है।
गरीबों को अन्न, कपड़ा, ताड़ूळ या गुड़-तिळ दान करें।
🌕 6. मार्गशीर्ष पूर्णिमा पर गीता पाठ करें
भगवद् गीता जयंती या पूर्णिमा के दिन गीता का पाठ करना अत्यंत फलदायी माना जाता है।
🪶 7. घर की शुद्धि और सकारात्मक ऊर्जा के लिए वास्तु उपाय
घर में संध्या के समय कपूर, गुड़-घी द्वारा दीपक जलाएं।
पूजा-घर स्वच्छ रखें, देवी-देवताओं की मूर्तियाँ पूर्व दिशा में रखें।
📅 मार्गशीर्ष मास 2025 की प्रमुख तिथियाँ
वर्ष 2025 में, मार्गशीर्ष मास 6 नवंबर, गुरुवार से शुरू होकर 4 दिसंबर, गुरुवार को समाप्त होगा।
यहाँ इस मास के मुख्य व्रत और त्योहारों की सूची दी गई है:
| तिथि | दिन | प्रमुख व्रत/त्योहार |
| 6 नवंबर | गुरुवार | मार्गशीर्ष मास का प्रारंभ |
| 8 नवंबर | शनिवार | संकष्टी चतुर्थी |
| 12 नवंबर | बुधवार | काल भैरव जयंती (कालाष्टमी) |
| 15 नवंबर | शनिवार | उत्पन्ना एकादशी (विष्णु पूजा का विशेष दिन) |
| 17 नवंबर | सोमवार | सोम प्रदोष व्रत |
| 18 नवंबर | मंगलवार | मासिक शिवरात्रि |
| 20 नवंबर | गुरुवार | मार्गशीर्ष अमावस्या (स्नान, दान और पितरों के तर्पण के लिए शुभ) |
| 25 नवंबर | मंगलवार | विवाह पंचमी (श्रीराम और सीता जी का विवाह उत्सव) |
| 26 नवंबर | बुधवार | स्कन्द षष्ठी, चम्पा षष्ठी |
| 1 दिसंबर | सोमवार | मोक्षदा एकादशी और गीता जयंती |
| 2 दिसंबर | मंगलवार | भौम प्रदोष व्रत |
| 4 दिसंबर | गुरुवार | मार्गशीर्ष पूर्णिमा, अन्नपूर्णा जयंती और दत्तात्रेय जयंती |
टिप: कृपया ध्यान दें कि ये तिथियाँ स्थान (जगह) के अनुसार कुछ समय से बदल सकती हैं — स्थानीय पंचांग देखें।
🌺 निष्कर्ष
मार्गशीर्ष मास एक ऐसा अवसर है जब हम भक्ति, सेवा और सदाचार के माध्यम से अपने जीवन में सकारात्मक ऊर्जा ला सकते हैं। जो भी व्यक्ति इस महीने श्रद्धापूर्वक पूजा-अर्चना और दान करता है, उसे भगवान श्रीकृष्ण व माता लक्ष्मी दोनों का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
✨ आप भी इस पवित्र मास में ऊपर दिए गए उपायों को आज़माएं और अपने अनुभव कमेंट में जरूर साझा करें।