अपरा एकादशी का महत्व और व्रत करने की विधि

Roshani

July 11, 2025

आज के वर्तमान समय में संसार का लगभग हर व्यक्ति किसी न किसी चिंता, तनाव या मानसिक परेशानी से घिरा रहता है। जब मनुष्य लगातार समस्याओं में उलझा रहता है, तब उसके मन में नकारात्मक विचार उत्पन्न होने लगते हैं। यही नकारात्मक सोच कई बार व्यक्ति को जाने-अनजाने में गलत कार्यों और पाप कर्मों की ओर ले जाती है।

कई बार मनुष्य ऐसी भूल कर बैठता है, जिसका उसे बाद में गहरा पश्चाताप होता है। जब मन आत्मग्लानि और अपराधबोध से भर जाता है, तब उन पापों से मुक्ति पाने के लिए अपरा एकादशी का व्रत अत्यंत प्रभावशाली माना गया है।


अपरा एकादशी का धार्मिक महत्व

धार्मिक ग्रंथों और मान्यताओं के अनुसार, अपरा एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति द्वारा किए गए जाने-अनजाने पाप, छोटी-बड़ी गलतियाँ और दोष नष्ट हो जाते हैं। यह व्रत मनुष्य को पापों की सजा से मुक्ति दिलाता है और आत्मा को शुद्ध करता है।

मान्यता है कि जो व्यक्ति सच्चे मन और श्रद्धा के साथ अपरा एकादशी का व्रत करता है, उसे इस लोक में यश, सम्मान और शांति की प्राप्ति होती है तथा परलोक में मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है।


अपरा एकादशी का व्रत कैसे करें?

जो भी श्रद्धालु अपरा एकादशी का व्रत रखना चाहते हैं, उन्हें निम्नलिखित विधि का पालन करना चाहिए:

  • एकादशी के दिन सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें
  • स्नान के बाद स्वच्छ और पवित्र वस्त्र धारण करें
  • घर के पूजा स्थान में श्री हरि विष्णु के समक्ष तुलसी के पत्ते अर्पित करें
  • धूप-दीप जलाकर पूर्ण श्रद्धा और भक्ति भाव से पूजा-अर्चना करें
  • विष्णु सहस्रनाम, एकादशी व्रत कथा या विष्णु मंत्रों का पाठ करें

इस दिन सात्त्विक आहार और शुद्ध विचार बनाए रखना अत्यंत आवश्यक माना गया है।


अपरा एकादशी व्रत का पारण कब करें?

अपरा एकादशी का व्रत सूर्यास्त के बाद ही खोला जाता है। पूरे दिन उपवास रखने के पश्चात संध्या समय पुनः श्री हरि विष्णु की पूजा करें और उसके बाद ही भोजन ग्रहण करें।

  • कुछ श्रद्धालु इस दिन निर्जला उपवास रखते हैं
  • कुछ लोग फलाहार करके व्रत का पालन करते हैं

व्रत का स्वरूप व्यक्ति अपनी श्रद्धा और स्वास्थ्य के अनुसार चुन सकता है।


अपरा एकादशी व्रत में क्या नहीं करना चाहिए?

अपरा एकादशी के व्रत में आचरण की शुद्धता अत्यंत आवश्यक है। इस दिन विशेष रूप से इन बातों से बचना चाहिए:

  • झूठ बोलना या अपशब्द कहना वर्जित है
  • किसी का अपमान, निंदा या कटु वचन नहीं बोलने चाहिए
  • क्रोध, ईर्ष्या और नकारात्मक विचारों से दूर रहना चाहिए

यदि व्रत के दौरान झूठ या अपशब्द बोले जाते हैं, तो व्रत का फल नष्ट हो जाता है और व्यक्ति पाप का भागी बन सकता है।


अपरा एकादशी का दिन कैसे बिताएं?

अपरा एकादशी का पूरा दिन यथासंभव श्री हरि विष्णु की भक्ति में बिताना चाहिए। इस दिन:

  • भजन-कीर्तन करें
  • जप-तप और ध्यान करें
  • धार्मिक ग्रंथों का पाठ करें

ऐसा करने से व्रत का फल कई गुना बढ़ जाता है और मन को शांति प्राप्त होती है।


निष्कर्ष

अपरा एकादशी केवल एक उपवास नहीं, बल्कि पापमोचन, आत्मशुद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का पावन अवसर है। श्रद्धा, नियम और संयम के साथ किया गया यह व्रत जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाता है और भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है।

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